कुरान किसने लिखा है

  • कुरान क्या है, कुरान किसने लिखा है  बहुत से  गैर-मुस्लिम लोग अक्सर  यही सवाल करते है की कुरान क्या है और कुरान किसने लिखा है !

कुछ लोगो कुरान के बारे में हमेशा यही कहते आये की इस इंसान ने खुद लिखा है

कुरान किसने लिखा है
कुरान किसने लिखा है

इस्लाम के  अनुसार कुरान किसने लिखा है

क़ुरआन ख़ुदा की भेजी हुई किताब है जिसको अल्लाह ने  गेब्रियल फ़रिश्ते के द्वारा इस्लाम आखिरी नबी मुह्म्मद मुस्तफा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को दुनिया में भेज था!

जिसमे अच्छी बाते और वो नसीहत है  जिससे बहुत कुछ सिखने को मिलता है! इस्लाम religion में Quran उनकी धार्मिक पुस्तक है!

जो अरबी भाषा में थी! पर आज के time पूरी दुनिया में इसको बहुत भाषाओं में translate किया जा चूका है!

कुरान word की meaning है “the recitation” जिसकी हिंदी है प्रवचन

angel को पूरी quran को पैगम्बर मुहम्मद तक पहुचने में 23 साल का वक्त लगा है!

Quran कब आया

अल्लाह ने कुरान में फ़रमाया है

वो रमजान का महिना है जिसमे  Quran नाजिल किया है

अल्लाह के नबी कहते है अल्लाह 114 सुरह नबी तक 23 साल तक थोड़ी करके अलग मौको पर जिब्रिल फ़रिश्ते द्वारा आप पर नाजिल करवाते!

अल्लाह पाक ने जिब्रिल फ़रिश्ते द्वारा नबी मुहम्मद को कुरान की आयते सीखते थे!

आप तक जो कुरान आ जाता वो आप बाकी सहबा को सुनते जो भी लोग उनमे पढना लिखना जानते थे कुरान की आयतों को पत्थर, पेड़ो के पत्तो पर लिखा कर अपने घर में मह्फुस कर रख लेते थे!

Quran किस पर नाजिल किया गया है

अल्लाह ने कुरान शरीफ को अपने आखिरी नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाजिल किया है जिसकी बात की गावाही अल्लाह पाक कुरआन देते है

मेरे नबी मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर ये किताब नाजिल होने से पहले कुछ लिख या पढ़ नहीं सकते थे अगर उनको पढना लिखना आता तो गुनागार बन्दे यही कहते की ये मुहम्मद ने खुद लिख लिया होगा!

जितने भी historical evidence मिलते ये साबित करते है मुहम्मद पढ़े लिखे नहीं थे!

  • हीरा गुफा और इस्लाम (कुरान किसने लिखा है)

 माना जाता पैगम्बर मुहम्मद को कुरआन का ज्ञान “हीरा” नामक गुफा में मिला!

जो की सऊदी अरब में मक्का से almost 2 मील की distance पर है मुसलमान इसके अन्दर जाते है लेकिन ये हज यात्रा का हिस्सा नहीं है

भले ही हज के दौरान मुसलमान और इसके को देखने ही क्यों ना जाते हो!

मदीना में रहने वाले मुहम्मद को ये हीरा नाम गुफा मिली आप इस रहकर खूब इबदात और मुकरबा करते जिससे उनके आवचेतन से उन्हें अल्लाह के और ज्यादा करीब कर दिया!

और अल्लाह ने उन पर कुरान नाजिल फरमाई जिससे वो दुनिया को सही रह दिखाये! कुरान की अच्छी बातो को मुहम्मद में अपने जाने-पहचने वाले लोगो में फैलना शुरू कर दिया ! जो एक धीरे-धीरे धर्म इस्लाम बन गया!

पुरे कुरान को लिखित रूप में एक साथ करना

655 year, में जायेद इब्न थाबित की अध्यक्षता में एक समूह ने मुहम्मद साहब की शिक्षाओ जो सभी और फैली हुई उस एक साथ लिखने का निर्णय लिया!

उन्होंने और बाकी मुसलमान ने भी उनका साथ दिया और मुहम्मद साहब की मुंह से कुरान के बारे में बोली जाने वाली बातो पूरा लिखा गया! जो हाथो से ही लिखा गया था!

जिससे इस्लाम के पहले खिलाफा अबू बक्र ने कुरान को संरक्षित करने के लिए रखा!

इसमें आदम, नुह , मूसा, और ईसाई मसीह की life की बाते आती है जिसमे हमें सिखने को मिलता है

नेकी के काम करना ही जन्नत की और लेकर जा

सकता है और बुरे काम करेगे और अल्लाह की नाफ़रमानी करेगा वो जह्ननम में डाला जायेगा!

बाइबल और कुरान में कई बाते सामान देखने को मिलती है!

अल्लाह के आखिरी नबी के दुनिया से रुक्सती के बाद अबू बक्र को मुसलमानों का खलिफा बनाया गया!

उस time के व्यक्ति ने आखिरी नबी होने का दावा दिया जिसका नाम मुस्लिमा कज्जब था!

हजरत अबू बक्र और उनके साथी ने उस जिहाद किया! इस लड़ाई में almost 70 सहाबा शहीद हो जो अच्छी तरह कुरान को पड़ सकते थे !

हजरत उमर अबू बक्र सिद्धिकी के पास गए और कहा

हजरत अबू बक्र में आपसे कुछ कहना चाहता हु! अगर वो मुसलमान भाई जिनको कुरान शरीफ पड़ना आता है जंग में शहीद होते है

quran का अलग-अलग हिस्सा जो लोगो के घरो में महफूज रखा उस लगो पढने मुश्किले आयेगी! इस बात पर अबू बक्र ये फैसला लिया कुरान का जो भी हिस्सा अलग-अलग घरो में एक साथ लाया जाए!

और जो भी कुरान अच्छे से पढने वाले हाफ़िज़े कुरान वो उनकी मदद इसको साथ एक किताब में लिखा जाए !

और वैसे ही किया! एक ऐसी किताब बनी जिसमे सारी आयते थी जिससे कुरान कहा जाता है

अबू बक्र के बाद इस आयिशा के पास रख वाया गया! फिर बाद में जब उमर मुसलमानो के खलीफा बने ये उनके घर में रख वाया गया!

हज़रत उमर की शहीद होने के बाद हजरत उस्मान को खलीफा बनाया जाता है (कुरान किसने लिखा है )

हज़रत उस्मान के दौर में islam का प्रचार अरब के बाहर भी फैलता जा रहा था! जिसमे india, ईरान, इंडोनेशिया, अफ्रीका आदि जैसे देशो तक पहुचने लगा!

यहाँ के लोगो कुरान को पढने और लिखने में गलतिया करने लगे क्युकि आरबी भाषा इन देशो की भाषा नहीं थी जिस वजह उन इसको समझने में थोड़ी गलतिया हो रही थी!

जब ये शिकयत हज़रत उमर तक पहुची की लगो कुरान को अलग-अलग तरफ से पड़ रहे है हजरत उमर ने कहा जिसके पास कुरान लिखा वो सब लाया जाए!

और जो भी नए कुरान दुनिया में बनाये गए थे उनको जला दीया गया!

क्युकि अल्लाह के नबी ने कहा था अगर कही कुरान कही लिखी है उसको फाड़ो मत उसको या जमींन दफ़न कर दो या जला दो!

इसलिए हम आज जिनते भी  कुरान दुनिया में देखते वो सब असली कुरान की copy ही है पर उसमे जेर जबर नहीं थे!

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कुरान किसने लिखा है

कुरान में ज़ेर-जबर कैसे आये! (कुरान किसने लिखा है)

कुरान में ज़ेर-जबर नहीं थे क्युकि अरबी अरब की मातृभाषा (mother tongue) थी! जिनको वो आसनी से समझ सकते थे!

हजाज़ बिन युसूफ ने देखा बिना जेर-जबर के जो लोगो अरब के नहीं उनको पढने में परेशानी आ रही है

लिहाज़ा कुरान में जेर-जबर लिखवा दिये गए! जिससे गैर अरबी को भी पढने में परेशानी ना हो!

इसलिए दोस्तों कुरान अकलमंदों के लिए नशिहत है

ये कुरान है ऐसी किताब है जिसे एक 4 साल का छोटा बच्छे से लेकर 100 के बुजुर्ग तक कुरान को हिफ्ज़ कर लेते है कुरान में अच्छी बाते है

जिससे इंसान को सीखती है उसको कैसे काम करने चाहिये !

दोस्तों मेरी पोस्ट पढकर  आप समझ गए होगे की कुरान किसने लिखा है 

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