बौद्ध धर्म क्या है और Buddhism religion belief क्या है

बुद्ध धर्म क्या है और  Buddhism religion की शुरआत कहा से हुई !  

शाक्य गणराज्य के समय में शुध्दोधन राजा के राजधानी कपिलवस्तु थी 563 ईस्वी पूर्व उनकी एक संतान हुई जिसका नाम सिध्दार्थ रखा गया गौतम गौत्र पैदा होने के कारण वो गौतम भी कहलाये!

माना जाता है रानी महामाया देवी आपने मायके जा रही थी जो की देवदह की और जाते में रस्ते हुआ इनका जन्म स्थान लुम्बनी में मना जाता है जो की नेपाल में है!

सिध्दार्थ के जन्म कुछ दिनों बाद उनकी माँ का निधन हो गया और उनका पालन पोषण उनकी मौसी महाप्रज़वती ने किया जो सुध्दोधन की दूसरी पत्नी थी!

शुध्दोधन राजा ने अपनी संतान पैदा होने के 5 दिन नामकरण के आठ साधू संतो को आमत्रित किया साधू संतो ने उसका नाम सिद्धार्थ रखा जिसकी meaning है

“जो सिध्दी प्राप्ति के लिए जन्मा हो” ! और लगभग सभी साधू संतो एक जैसी भविष्यवाणी की या आपकी संतान महान राजा बनेगे या फिर एक पवित्र पथ प्रदर्शक बनेगा!

बौद्ध धर्म क्या है और Buddhism religion belief क्या है
बौद्ध धर्म क्या है और Buddhism religion belief क्या है

सिध्दार्थ गौतम का बचपन और बाल्यावस्था

बचपन से सिध्र्दार्थ के मन में दया और हमदर्दी थी ! जब वे घोड़े की सवारी करते और घोड़े में झाग आने लगता देखते तो समझ जाते घोडा थक गया है

और उसके आराम देने के लिए वही रोक देते! सिध्दार्थ खेल में जान बुझकर हार जाते जिससे सामने वाले को ख़ुशी मिले! और उनका साथी को दुःख ना हो!

एक उनके चेचेरे भाई देवदत अपने तीर से एक हंस को घायल कर देते सिध्दार्थ उसके प्राणों की रखा करते है और उसको देवदत को मरने नहीं देते है!

उन्होंने अपने गुरु विश्वामित्र  से वेद और उपनिषद पढ़े और राज काज और युद्ध कला की शिक्षाये भी सीखी! कुश्ती, तीर-कमान, घुड़दौड़, या रथ चलने में उनको हराना आसान ना था!

सिध्दार्थ गौतम का विवाह

सिध्दार्थ गौतम का विवाह छोटी उम्र में उनके पिता ने यशोधरा नाम की कन्या से करा दिया था! उस समय उनकी age 16 साल की थी!

और जीवन के आनंद ले लिए उनके पिता ने उनका महल ऐसा बना रखा था जो हर ऋतू के अनुकूल था! उस महल सुदारता की कोई कमी ना थी! अभी जरुरत की जीज उस में मौजूद थी!

वो अपनी पत्नी यशोधरा के साथ सुखी पूर्ण जीवन जी रहे थे! उनके एक संतान हुई जिसका नाम राहुल रखा गया!

पिता शुध्दोधन का डर

उनके पिता शुध्दोधन ने उनका जीवान अच्छा बीते और वो जीवन और शादी-सुदा जीवन का आनंद से जिए उसके उनका भव्य महल बना रखा था

जहा internment के लिए दास और दासी मौजूद रहते थे जो नाचते और गाते और मनोरंजन करते थे! जिसे वो संसार के दुखो से दूर रहे और राज्य को छोड़कर कभी ना जाये!

क्योकि राजा शुध्दोधन गौतम के भविष्य की चिंता होती थी क्योकि साधू संतो ने कहा था आपका बच्चा या एक महान राजा बनेगा या एक पवित्र पथ प्रदर्शक बानेगा !

What is Buddhism and what is Buddhism religion belief
जीवन का सच जो की बौद्ध धर्म और Buddhism                       religion belief की वजह बना

सिध्दार्थ गौतम के मन से दुनिया मोह का ख़त्म होना और Buddhism religion की नीव की शुरुआत 

बसन्त ऋतु का time था चारो तरह खुशनुमा मौहाल था फ़ल और फूलो से पड़े-पोधे लधे हुए थे ऐसे में सिद्धार्थ का अपने राज्य में घुमने का मन करने लगा वो अपने एक सारथि के साथ के साथ अपने राज्य में घुमने को जाने लगे!

सबसे पहले एक छोटा बच्चा रस्ते में आता है जिस देख सिध्दार्थ प्रश्न ये छोटा बच्चा! सारथि कहते हम एक जब पैदा होते है सब इस शुरआत में इसी age में होते है!

थोड़ी आगे चलने के बाद एक बारात जा रही थी जिसमे एक जवान व्यक्ति घोड़े पर बैठा होता है सिद्धार्थ अपने सारथि से पूछते है ये क्या हो रहा है सारथि कहता है ये हम सबके साथ होता है जब एक बच्चा बचपन और बाल्यावस्था को पार कर लेता उसका विवाह कर दिया जाता है!

तीसरी बार एक बुढा व्यक्ति सामने आता है जो लाठी के सहारे चल रहा है उसके मुंह में दन्त नज़र नहीं आ रहे है उसके सारे बाल सफ़ेद हो चुके है उसकी कमर झुकी हुई वहा कांपता हुआ बहुत मुश्किल से चल पा रहा है!

सिद्धार्थ सारथि से पूछते है ये कौन है सारथि ये एक बुढा व्यक्ति कौन है सारथि कहता है हम सबके साथ ऐसा होता छोटे से हम जवानी में कदम रखते है जावानी केबाद बुढ्पा ही आता है!

अब की सामने एक इन्सान जिसको कोई रोग है जिसकी वजह से उसका शरीर देखने में हड्डियों का कंकाल सा लग रहा है उसकी चेहरा पिला पड़ा हुआ था उस साँस तेज चल रही थी!

सिद्धार्थ ने सारथि से पूछा इसको क्या हो गया सारथि इसको एक भयनक बीमारी लग गई है जिसकी वजह से इसकी ये हालत हो गई है!

आगे चलते हुए एक अर्थी देखने को मिलती है जिसको चार आदमी अपने कंधे पर उठाकर चले जा रहे है और उसके पीछे बहुत से लोग चले जा रहे है

उनमे से कुछ बहुत बुरी तरह रो रहे है इस दृश्य को देखकर सिद्धार्थ बहुत बैचन से हो गए और पूछने लगे सारथि इसको क्या हुआ है!

सारथि कहता है ये जो सब आपने देखा ये सब सच है एक जीवन जब इस धरती पर आता है वो हड्डी और मॉस शरीर रूप में आता है

सबसे शिशु रूप फिर वह जवानी में बाल्यावस्था के बाद प्रवेश करता जवानी के बाद बुढपा और और बुढपे के बाद इस शरीर की मृत्यु हो जाती है पर कभी इस शरीर को भयानक बीमारी भी पकड़ लेती है

सिद्धार्थ कहते में एक दिन बुढा होकर मर जाउगा मेरी पत्नी मेरा पिता वो भी एक दिन मर जायेगे! सारथि कहते यही कुदरत का नियम जो इस संसार में आया है उस ये शरीर छोड़ा इस दुनिया से एक दिन जाना  पड़ता है!

कैसे क्यों होता है इन रहस्य जाने से सवाल से बौद्ध धर्म (Buddhism religion) की नीव डालती है

सच की तलाश से महल और परिवार को छोड़ देना

अपनी पत्नी और दूधमुहे बच्चे को सिद्धार्थ छोड़ने का फैसला करते और अपना राज्यपाठ सब छोड़ कर सच खोज में निकल जाते है!

घर से निकलने बाद आलार कालम को अपना पहला गुरु बनाते है और सिद्धार्थ उनसे योग-साधनाओं को सीखते है और तपस्या के बारे में सीखते है और सच की खोज करने के लिए तरह-तरह की तपस्या करने लगते है!

शुरू तपस्या में बहुत कम खाना खा सिद्धार्थ तपस्या करते थे फिर उन्होंने वो छोड़ दिया और बिना आहार के तपस्या करने लगे!

जिसकी वजह उनका शरीर सुखकर कटा हो गया 6 साल उनका तपस्या करते हो गए पर सच को वो अभी भी ढूढ़ रहे थे!

एक स्त्रियाँ सिद्धार्थ के पास गुजार कही जा रही थी उन्होंने वो एक गीत गाते हुए जा रही थी शायद वो सिद्धार्थ को गीत के माध्याम से कुछ कहना चाहती है! वो ये गीत गा रही थी!

वीणा के तारो को मत छोड़ की उसमे से सुर ही ना निकले और ना तारो को इतना ज्यादा कसो की तर ही टूट जाए!

सिद्धार्थ समझ गए इस शरीर से तपस्या करने के लिए इस शरीर में शक्ति का होना जरुरी है!

इसलिए उन्होंने माध्यम मार्ग चुना जो कहता शरीर में कितना आहार तो डालो जिस जो काम आप करना चाहो वो आराम से कर सको!

सच रूप ज्ञान की प्रप्ति

बिहार में बोधगया नाम की जगह पर एक पीपल के निचे सिद्धार्थ तपस्या करते है और एक रात उनका सच्चा का बोध हुआ यानी सच का ज्ञान हुआ

तब ही से सिद्धार्थ बुद्ध कहलाने लगे जिस पीपल के निचे उनका ज्ञान की प्राप्ति हुई उसको बोधिवृक्ष नाम से पुकारा जाने लगा!

यही से बौद्ध धर्म या Buddhism religion का जन्म होता है! उन्होंने जो ज्ञान मिला उसका प्रचार करना शुरू कर दिया उहोने पांच अनुयायी बनाया और उन्होंने उनका अपने ज्ञान को आगे फैलने के लिए भेज दिया यही बौद्ध धर्म बना (Buddhism religion ).

बुद्ध का इस दुनिया से जाना

माना जाता है 80 साल की आयु में बुद्ध ने अपनी आखरी भिक्षा मागी और जिसके बाद वो बीमार हो गाये उसके बाद उन्होंने आपने शिष्य को अपने आखिरी उपदेश दिए और अपना देह को त्याग किया!

बुद्ध के उपदेश

लोगो माध्यम मार्ग पर चलने के लिए कहा उन्होंने अहिंसा पर बहुत जोर दिया!  उन्होंने यज्ञ और पशु बलि की निंदा की!

बौद्ध धर्म के प्रचार से भिक्षुओ की संख्या बहुत ही बढने लगी यहाँ तक राजा महाराजा भी बौद्ध धर्म को अपनाने लगे!

इन लोगो समझने और संभल के बौद्ध संघ बना ! बौद्ध धर्म के प्रचार भारत से धीरे-धीरे पूरी दुनिया में होने लगा चीन, जापान, कोरिया आदि देश में बौद्ध धर्म पर लोगो विश्वास करते है और बुद्ध को भगवान मान कर उनकी पूजा करते है!

बौद्ध धर्म  Buddhism religion belief  है सिद्धार्थ यानी बुद्ध ही उनके भगवान् है जिन्होंने सच का ज्ञान उन तक पहुंचाया है !

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